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  • १९३ - हनुमान जी और श्री राम जी का संवाद

    दोहा :
    * ता कहुँ प्रभु कछु अगम नहिं जा पर तुम्ह अनुकूल।
    तव प्रभावँ बड़वानलहि जारि सकइ खलु तूल॥33॥

    भावार्थ:-हे प्रभु! जिस पर आप प्रसन्न हों, उसके लिए कुछ भी कठिन नहीं है। आपके प्रभाव से रूई (जो स्वयं बहुत जल्दी जल जाने वाली वस्तु है) बड़वानल को निश्चय ही जला सकती है (अर्थात्‌ असंभव भी संभव हो सकता है)॥3॥

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