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  • १९४ - हनुमान जी और श्री राम जी का संवाद

    चौपाई :
    * नाथ भगति अति सुखदायनी। देहु कृपा करि अनपायनी॥
    सुनि प्रभु परम सरल कपि बानी। एवमस्तु तब कहेउ भवानी॥1॥

    भावार्थ:-हे नाथ! मुझे अत्यंत सुख देने वाली अपनी निश्चल भक्ति कृपा करके दीजिए। हनुमान्‌जी की अत्यंत सरल वाणी सुनकर, हे भवानी! तब प्रभु श्री रामचंद्रजी ने 'एवमस्तु' (ऐसा ही हो) कहा॥1॥

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Krishna Kutumb
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