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  • १९६ - वानरगण कहने लगे- कृपालु आनंदकंद श्री रामजी की जय हो जय हो

    * सुनि प्रभु बचन कहहिं कपि बृंदा। जय जय जय कृपाल सुखकंदा॥
    तब रघुपति कपिपतिहि बोलावा। कहा चलैं कर करहु बनावा॥3॥

    भावार्थ:-प्रभु के वचन सुनकर वानरगण कहने लगे- कृपालु आनंदकंद श्री रामजी की जय हो जय हो, जय हो! तब श्री रघुनाथजी ने कपिराज सुग्रीव को बुलाया और कहा- चलने की तैयारी करो॥3॥

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Krishna Kutumb
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