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  • १९७ - देवता आकाश से अपने-अपने लोक को चले

    *अब बिलंबु केह कारन कीजे। तुरंत कपिन्ह कहँ आयसु दीजे॥
    कौतुक देखि सुमन बहु बरषी। नभ तें भवन चले सुर हरषी॥4॥

    भावार्थ:-अब विलंब किस कारण किया जाए। वानरों को तुरंत आज्ञा दो। (भगवान्‌ की) यह लीला (रावणवध की तैयारी) देखकर, बहुत से फूल बरसाकर और हर्षित होकर देवता आकाश से अपने-अपने लोक को चले॥4॥

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Krishna Kutumb
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