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  • २०० - राम जी ने हर्षित होकर प्रस्थान किया

    * राम कृपा बल पाइ कपिंदा। भए पच्छजुत मनहुँ गिरिंदा॥
    हरषि राम तब कीन्ह पयाना। सगुन भए सुंदर सुभ नाना॥2॥

    भावार्थ:-राम कृपा का बल पाकर श्रेष्ठ वानर मानो पंखवाले बड़े पर्वत हो गए। तब श्री रामजी ने हर्षित होकर प्रस्थान (कूच) किया। अनेक सुंदर और शुभ शकुन हुए॥2॥

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Krishna Kutumb
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