Loading...

  • २०७ - राक्षसों का भयभीत होना

    मंदोदरी-रावण संवाद

    चौपाई :
    *उहाँ निसाचर रहहिं ससंका। जब तें जारि गयउ कपि लंका॥
    निज निज गृहँ सब करहिं बिचारा। नहिं निसिचर कुल केर उबारा।1॥

    भावार्थ:-वहाँ (लंका में) जब से हनुमान्‌जी लंका को जलाकर गए, तब से राक्षस भयभीत रहने लगे। अपने-अपने घरों में सब विचार करते हैं कि अब राक्षस कुल की रक्षा (का कोई उपाय) नहीं है॥1॥

    |0|0