Loading...

  • १२१- मंदोदरी का रावण को समझाना

    दोहा :
    * राम बान अहि गन सरिस निकर निसाचर भेक।
    जब लगि ग्रसत न तब लगि जतनु करहु तजि टेक॥36॥

    भावार्थ:-श्री रामजी के बाण सर्पों के समूह के समान हैं और राक्षसों के समूह मेंढक के समान। जब तक वे इन्हें ग्रस नहीं लेते (निगल नहीं जाते) तब तक हठ छोड़कर उपाय कर लीजिए॥36॥

    |0|0
Krishna Kutumb
ब्लॉग सूची 0 0 प्रवेश