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  • २१३ - मंदोदरी का रावण से संवाद

    चौपाई :
    * श्रवन सुनी सठ ता करि बानी। बिहसा जगत बिदित अभिमानी॥
    सभय सुभाउ नारि कर साचा। मंगल महुँ भय मन अति काचा॥1॥

    भावार्थ:-मूर्ख और जगत प्रसिद्ध अभिमानी रावण कानों से उसकी वाणी सुनकर खूब हँसा (और बोला-) स्त्रियों का स्वभाव सचमुच ही बहुत डरपोक होता है। मंगल में भी भय करती हो। तुम्हारा मन (हृदय) बहुत ही कच्चा (कमजोर) है॥1॥

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Krishna Kutumb
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