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  • २१५ - मंदोदरी का रावण को समझाना

    * जौं आवइ मर्कट कटकाई। जिअहिं बिचारे निसिचर खाई॥
    कंपहिं लोकप जाकीं त्रासा। तासु नारि सभीत बड़ि हासा॥2॥

    भावार्थ:-यदि वानरों की सेना आवेगी तो बेचारे राक्षस उसे खाकर अपना जीवन निर्वाह करेंगे। लोकपाल भी जिसके डर से काँपते हैं, उसकी स्त्री डरती हो, यह बड़ी हँसी की बात है॥2॥

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Krishna Kutumb
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