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  • २२४ - रावण और विभीषण संवाद

    चौपाई :
    * तात राम नहिं नर भूपाला। भुवनेस्वर कालहु कर काला॥
    ब्रह्म अनामय अज भगवंता। ब्यापक अजित अनादि अनंता॥1॥

    भावार्थ:-हे तात! राम मनुष्यों के ही राजा नहीं हैं। वे समस्त लोकों के स्वामी और काल के भी काल हैं। वे (संपूर्ण ऐश्वर्य, यश, श्री, धर्म, वैराग्य एवं ज्ञान के भंडार) भगवान्‌ हैं, वे निरामय (विकाररहित), अजन्मे, व्यापक, अजेय, अनादि और अनंत ब्रह्म हैं॥1॥

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Krishna Kutumb
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