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  • २ २ ८ - रावण और विभीषण संवाद

    दोहा :
    * बार बार पद लागउँ बिनय करउँ दससीस।
    परिहरि मान मोह मद भजहु कोसलाधीस॥39क॥

    भावार्थ:-हे दशशीश! मैं बार-बार आपके चरणों लगता हूँ और विनती करता हूँ कि मान, मोह और मद को त्यागकर आप कोसलपति श्री रामजी का भजन कीजिए॥39 (क)॥

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Krishna Kutumb
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