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  • २३० - रावण की सभा में एक और बुद्धिमान मंत्री

    चौपाई :
    * माल्यवंत अति सचिव सयाना। तासु बचन सुनि अति सुख माना॥
    तात अनुज तव नीति बिभूषन। सो उर धरहु जो कहत बिभीषन॥1॥

    भावार्थ:-माल्यवान्‌ नाम का एक बहुत ही बुद्धिमान मंत्री था। उसने उन (विभीषण) के वचन सुनकर बहुत सुख माना (और कहा-) हे तात! आपके छोटे भाई नीति विभूषण (नीति को भूषण रूप में धारण करने वाले अर्थात्‌ नीतिमान्‌) हैं। विभीषण जो कुछ कह रहे हैं उसे हृदय में धारण कर लीजिए॥1॥

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Krishna Kutumb
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