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  • २४० - विभीषण का भगवान श्री रामजी की शरण के लिए प्रस्थान

    विभीषण का भगवान् श्री रामजी की शरण के लिए प्रस्थान और शरण प्राप्ति
    दोहा :
    * रामु सत्यसंकल्प प्रभु सभा कालबस तोरि।
    मैं रघुबीर सरन अब जाउँ देहु जनि खोरि॥41॥

    भावार्थ:-श्री रामजी सत्य संकल्प एवं (सर्वसमर्थ) प्रभु हैं और (हे रावण) तुम्हारी सभा काल के वश है। अतः मैं अब श्री रघुवीर की शरण जाता हूँ, मुझे दोष न देना॥41॥

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Krishna Kutumb
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