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  • २४१ - राक्षसों की मृत्यु निश्चित होना

    चौपाई :
    * अस कहि चला बिभीषनु जबहीं। आयू हीन भए सब तबहीं॥
    साधु अवग्या तुरत भवानी। कर कल्यान अखिल कै हानी॥1॥

    भावार्थ:-ऐसा कहकर विभीषणजी ज्यों ही चले, त्यों ही सब राक्षस आयुहीन हो गए। (उनकी मृत्यु निश्चित हो गई)। (शिवजी कहते हैं-) हे भवानी! साधु का अपमान तुरंत ही संपूर्ण कल्याण की हानि (नाश) कर देता है॥1॥

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Krishna Kutumb
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