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  • २५० - हनुमान जी का हर्षित होना

    * सुनि प्रभु बचन हरष हनुमाना। सरनागत बच्छल भगवाना॥5॥

    भावार्थ:-प्रभु के वचन सुनकर हनुमान्‌जी हर्षित हुए (और मन ही मन कहने लगे कि) भगवान्‌ कैसे शरणागतवत्सल (शरण में आए हुए पर पिता की भाँति प्रेम करने वाले) हैं॥5॥

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Krishna Kutumb
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