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  • २५३ - श्री राम जी का कथन

    * पापवंत कर सहज सुभाऊ। भजनु मोर तेहि भाव न काऊ॥
    जौं पै दुष्ट हृदय सोइ होई। मोरें सनमुख आव कि सोई॥2॥

    भावार्थ:-पापी का यह सहज स्वभाव होता है कि मेरा भजन उसे कभी नहीं सुहाता। यदि वह (रावण का भाई) निश्चय ही दुष्ट हृदय का होता तो क्या वह मेरे सम्मुख आ सकता था?॥2॥

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Krishna Kutumb
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