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  • २५६ - श्री रामजी का हँसना

    दोहा :
    * उभय भाँति तेहि आनहु हँसि कह कृपानिकेत।
    जय कृपाल कहि कपि चले अंगद हनू समेत॥44॥

    भावार्थ:-कृपा के धाम श्री रामजी ने हँसकर कहा- दोनों ही स्थितियों में उसे ले आओ। तब अंगद और हनुमान्‌ सहित सुग्रीवजी 'कपालु श्री रामजी की जय हो' कहते हुए चले॥4॥

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Krishna Kutumb
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