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  • २५९ - श्री राम जी और विभीषण संवाद

    * सघ कंध आयत उर सोहा। आनन अमित मदन मन मोहा॥
    नयन नीर पुलकित अति गाता। मन धरि धीर कही मृदु बाता॥3॥

    भावार्थ:-सिंह के से कंधे हैं, विशाल वक्षःस्थल (चौड़ी छाती) अत्यंत शोभा दे रहा है। असंख्य कामदेवों के मन को मोहित करने वाला मुख है। भगवान्‌ के स्वरूप को देखकर विभीषणजी के नेत्रों में (प्रेमाश्रुओं का) जल भर आया और शरीर अत्यंत पुलकित हो गया। फिर मन में धीरज धरकर उन्होंने कोमल वचन कहे॥3॥

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