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  • २६३ - श्री राम जी का लक्ष्मणजी सहित गले मिलना

    * अनुज सहित मिलि ढिग बैठारी। बोले बचन भगत भय हारी॥
    कहु लंकेस सहित परिवारा। कुसल कुठाहर बास तुम्हारा॥2॥

    भावार्थ:-छोटे भाई लक्ष्मणजी सहित गले मिलकर उनको अपने पास बैठाकर श्री रामजी भक्तों के भय को हरने वाले वचन बोले- हे लंकेश! परिवार सहित अपनी कुशल कहो। तुम्हारा निवास बुरी जगह पर है॥2॥

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