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  • २६३ - श्री राम जी और विभीषण संवाद

    * खल मंडली बसहु दिनु राती। सखा धरम निबहइ केहि भाँती॥
    मैं जानउँ तुम्हारि सब रीती। अति नय निपुन न भाव अनीती॥3॥

    भावार्थ:-दिन-रात दुष्टों की मंडली में बसते हो। (ऐसी दशा में) हे सखे! तुम्हारा धर्म किस प्रकार निभता है? मैं तुम्हारी सब रीति (आचार-व्यवहार) जानता हूँ। तुम अत्यंत नीतिनिपुण हो, तुम्हें अनीति नहीं सुहाती॥3॥

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Krishna Kutumb
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