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  • २७१ - श्री राम जी और विभीषण संवाद

    दोहा :
    * अहोभाग्य मम अमित अति राम कृपा सुख पुंज।
    देखेउँ नयन बिरंचि सिव सेब्य जुगल पद कंज॥47॥

    भावार्थ:-हे कृपा और सुख के पुंज श्री रामजी! मेरा अत्यंत असीम सौभाग्य है, जो मैंने ब्रह्मा और शिवजी के द्वारा सेवित युगल चरण कमलों को अपने नेत्रों से देखा॥47॥

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