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  • २७३ - श्री राम जी का कथन

    * तजि मद मोह कपट छल नाना। करउँ सद्य तेहि साधु समाना॥
    जननी जनक बंधु सुत दारा। तनु धनु भवन सुहृद परिवारा॥2॥

    भावार्थ:-और मद, मोह तथा नाना प्रकार के छल-कपट त्याग दे तो मैं उसे बहुत शीघ्र साधु के समान कर देता हूँ। माता, पिता, भाई, पुत्र, स्त्री, शरीर, धन, घर, मित्र और परिवार॥2॥

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