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  • २७७ - श्री राम जी और विभीषण संवाद

    चौपाई :
    * सुनु लंकेस सकल गुन तोरें। तातें तुम्ह अतिसय प्रिय मोरें॥।
    राम बचन सुनि बानर जूथा। सकल कहहिं जय कृपा बरूथा॥1॥

    भावार्थ:-हे लंकापति! सुनो, तुम्हारे अंदर उपर्युक्त सब गुण हैं। इससे तुम मुझे अत्यंत ही प्रिय हो। श्री रामजी के वचन सुनकर सब वानरों के समूह कहने लगे- कृपा के समूह श्री रामजी की जय हो॥1॥

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Krishna Kutumb
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