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  • १८ ३ - श्री राम जी का और शिव जी का वर्रण

    * जो संपति सिव रावनहि दीन्हि दिएँ दस माथ।
    सोइ संपदा बिभीषनहि सकुचि दीन्हि रघुनाथ॥49ख॥

    भावार्थ:-शिवजी ने जो संपत्ति रावण को दसों सिरों की बलि देने पर दी थी, वही संपत्ति श्री रघुनाथजी ने विभीषण को बहुत सकुचते हुए दी॥49 (ख)॥

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Krishna Kutumb
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