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  • १८ ५ - श्री राम जी का वर्रण

    * पुनि सर्बग्य सर्ब उर बासी। सर्बरूप सब रहित उदासी॥
    बोले बचन नीति प्रतिपालक। कारन मनुज दनुज कुल घालक॥2॥

    भावार्थ:-फिर सब कुछ जानने वाले, सबके हृदय में बसने वाले, सर्वरूप (सब रूपों में प्रकट), सबसे रहित, उदासीन, कारण से (भक्तों पर कृपा करने के लिए) मनुष्य बने हुए तथा राक्षसों के कुल का नाश करने वाले श्री रामजी नीति की रक्षा करने वाले वचन बोले-॥2॥

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Krishna Kutumb
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