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  • १८ ६ - समुद्र पार करने के लिए विचार

    समुद्र पार करने के लिए विचार, रावणदूत शुक का आना और लक्ष्मणजी के पत्र को लेकर लौटना

    * सुनु कपीस लंकापति बीरा। केहि बिधि तरिअ जलधि गंभीरा॥
    संकुल मकर उरग झष जाती। अति अगाध दुस्तर सब भाँति॥3॥

    भावार्थ:-हे वीर वानरराज सुग्रीव और लंकापति विभीषण! सुनो, इस गहरे समुद्र को किस प्रकार पार किया जाए? अनेक जाति के मगर, साँप और मछलियों से भरा हुआ यह अत्यंत अथाह समुद्र पार करने में सब प्रकार से कठिन है॥3॥

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