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  • २९१ - समुद्र पार करने के लिए विचार

    * सुनत बिहसि बोले रघुबीरा। ऐसेहिं करब धरहु मन धीरा॥
    अस कहि प्रभु अनुजहि समुझाई। सिंधु समीप गए रघुराई॥3॥

    भावार्थ:-यह सुनकर श्री रघुवीर हँसकर बोले- ऐसे ही करेंगे, मन में धीरज रखो। ऐसा कहकर छोटे भाई को समझाकर प्रभु श्री रघुनाथजी समुद्र के समीप गए॥3॥

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Krishna Kutumb
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