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  • २९५ - रावणदूत शुक का पकड़ा जाना

    * कह सुग्रीव सुनहु सब बानर। अंग भंग करि पठवहु निसिचर॥
    सुनि सुग्रीव बचन कपि धाए। बाँधि कटक चहु पास फिराए॥2॥

    भावार्थ:-सुग्रीव ने कहा- सब वानरों! सुनो, राक्षसों के अंग-भंग करके भेज दो। सुग्रीव के वचन सुनकर वानर दौड़े। दूतों को बाँधकर उन्होंने सेना के चारों ओर घुमाया॥2॥

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Krishna Kutumb
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