Loading...

  • २९६ - रावणदूत शुक का पकड़ा जाना

    * बहु प्रकार मारन कपि लागे। दीन पुकारत तदपि न त्यागे॥
    जो हमार हर नासा काना। तेहि कोसलाधीस कै आना॥3॥

    भावार्थ:-वानर उन्हें बहुत तरह से मारने लगे। वे दीन होकर पुकारते थे, फिर भी वानरों ने उन्हें नहीं छोड़ा। (तब दूतों ने पुकारकर कहा-) जो हमारे नाक-कान काटेगा, उसे कोसलाधीश श्री रामजी की सौगंध है॥ 3॥

    |0|0