Loading...

  • २९७ - लक्ष्मणजी के पत्र को लेकर लौटना

    * सुनि लछिमन सब निकट बोलाए। दया लागि हँसि तुरत छोड़ाए॥
    रावन कर दीजहु यह पाती। लछिमन बचन बाचु कुलघाती॥4॥

    भावार्थ:-यह सुनकर लक्ष्मणजी ने सबको निकट बुलाया। उन्हें बड़ी दया लगी, इससे हँसकर उन्होंने राक्षसों को तुरंत ही छुड़ा दिया। (और उनसे कहा-) रावण के हाथ में यह चिट्ठी देना (और कहना-) हे कुलघातक! लक्ष्मण के शब्दों (संदेसे) को बाँचो॥4॥

    |0|0
Krishna Kutumb
ब्लॉग सूची 0 0 प्रवेश
Open In App