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  • २९९ - लक्ष्मणजी के पत्र को लेकर लौटना

    चौपाई :
    * तुरत नाइ लछिमन पद माथा। चले दूत बरनत गुन गाथा॥
    कहत राम जसु लंकाँ आए। रावन चरन सीस तिन्ह नाए॥1॥

    भावार्थ:-लक्ष्मणजी के चरणों में मस्तक नवाकर, श्री रामजी के गुणों की कथा वर्णन करते हुए दूत तुरंत ही चल दिए। श्री रामजी का यश कहते हुए वे लंका में आए और उन्होंने रावण के चरणों में सिर नवाए॥1॥

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Krishna Kutumb
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