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  • ३०० - रावण का हँसना

    * बिहसि दसानन पूँछी बाता। कहसि न सुक आपनि कुसलाता॥
    पुन कहु खबरि बिभीषन केरी। जाहि मृत्यु आई अति नेरी॥2॥

    भावार्थ:-दशमुख रावण ने हँसकर बात पूछी- अरे शुक! अपनी कुशल क्यों नहीं कहता? फिर उस विभीषण का समाचार सुना, मृत्यु जिसके अत्यंत निकट आ गई है॥2॥

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