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  • रावण और शुक का संवाद

    * करत राज लंका सठ त्यागी। होइहि जव कर कीट अभागी॥
    पुनि कहु भालु कीस कटकाई। कठिन काल प्रेरित चलि आई॥3॥

    भावार्थ:-मूर्ख ने राज्य करते हुए लंका को त्याग दिया। अभागा अब जौ का कीड़ा (घुन) बनेगा (जौ के साथ जैसे घुन भी पिस जाता है, वैसे ही नर वानरों के साथ वह भी मारा जाएगा), फिर भालु और वानरों की सेना का हाल कह, जो कठिन काल की प्रेरणा से यहाँ चली आई है॥3॥

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Krishna Kutumb
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