Loading...

  • रावण और शुक का संवाद

    दोहा :
    * रावन दूत हमहि सुनि काना। कपिन्ह बाँधि दीन्हें दुख नाना॥
    श्रवन नासिका काटैं लागे। राम सपथ दीन्हें हम त्यागे॥2॥

    भावार्थ:-हम रावण के दूत हैं, यह कानों से सुनकर वानरों ने हमें बाँधकर बहुत कष्ट दिए, यहाँ तक कि वे हमारे नाक-कान काटने लगे। श्री रामजी की शपथ दिलाने पर कहीं उन्होंने हमको छोड़ा॥2॥

    |0|0