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  • राम जी के सेना का वर्रण

    * पूँछिहु नाथ राम कटकाई। बदन कोटि सत बरनि न जाई॥
    नाना बरन भालु कपि धारी। बिकटानन बिसाल भयकारी॥3॥

    भावार्थ:-हे नाथ! आपने श्री रामजी की सेना पूछी, सो वह तो सौ करोड़ मुखों से भी वर्णन नहीं की जा सकती। अनेकों रंगों के भालु और वानरों की सेना है, जो भयंकर मुख वाले, विशाल शरीर वाले और भयानक हैं॥3॥

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