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  • रावण और शुक का संवाद

    * जनकसुता रघुनाथहि दीजे। एतना कहा मोर प्रभु कीजे॥
    जब तेहिं कहा देन बैदेही। चरन प्रहार कीन्ह सठ तेही॥4॥

    भावार्थ:-जानकीजी श्री रघुनाथजी को दे दीजिए। हे प्रभु! इतना कहना मेरा कीजिए। जब उस (दूत) ने जानकीजी को देने के लिए कहा, तब दुष्ट रावण ने उसको लात मारी॥4॥

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Krishna Kutumb
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