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  • समुद्र का श्री राम जी से विनती

    चौपाई :
    * नाथ नील नल कपि द्वौ भाई। लरिकाईं रिषि आसिष पाई॥
    तिन्ह कें परस किएँ गिरि भारे। तरिहहिं जलधि प्रताप तुम्हारे॥1॥

    भावार्थ:-(समुद्र ने कहा)) हे नाथ! नील और नल दो वानर भाई हैं। उन्होंने लड़कपन में ऋषि से आशीर्वाद पाया था। उनके स्पर्श कर लेने से ही भारी-भारी पहाड़ भी आपके प्रताप से समुद्र पर तैर जाएँगे॥1॥

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Krishna Kutumb
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