Loading...

  • समुद्र का श्री राम जी से विनती

    * देखि राम बल पौरुष भारी। हरषि पयोनिधि भयउ सुखारी॥
    सकल चरित कहि प्रभुहि सुनावा। चरन बंदि पाथोधि सिधावा॥4॥

    भावार्थ:-श्री रामजी का भारी बल और पौरुष देखकर समुद्र हर्षित होकर सुखी हो गया। उसने उन दुष्टों का सारा चरित्र प्रभु को कह सुनाया। फिर चरणों की वंदना करके समुद्र चला गया॥4॥

    |0|0