Loading...

  • श्री कृष्णा भगवान ने अर्जुन से कहा

    आत्मौपम्येन सर्वत्र समं पश्यति योऽर्जुन ।
    सुखं वा यदि वा दुःखं स योगी परमो मतः ॥६- ३२॥

    हे अर्जुन! जो योगी अपनी आत्मा जैसे सभी भूतों को समान देखता है और सुख या दुःख को भी सभी भूतों में समान देखता है, वह योगी परम श्रेष्ठ माना गया है॥32॥

    |0|0
Krishna Kutumb
ब्लॉग सूची 0 0 प्रवेश
Open In App