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  • अर्जुन ने श्री कृष्णा से कहा

    असंयतात्मना योगो दुष्प्राप इति मे मतिः।
    वश्यात्मना तु यतता शक्योऽवाप्तुमुपायतः॥६-३६॥

    जिसका मन वश में किया हुआ नहीं है, ऐसे पुरुष द्वारा योग प्राप्त होना कठिन है और वश में किए हुए मन वाले प्रयत्नशील पुरुष द्वारा उसका प्राप्त होना सहज है- यह मेरा मत है॥36॥

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Krishna Kutumb
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