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  • श्री कृष्णा भगवान ने अर्जुन से कहा

    मत्तः परतरं नान्य-
    त्किंचिदस्ति धनंजय ।
    मयि सर्वमिदं प्रोतं सूत्रे मणिगणा इव ॥७- ७॥

    हे धनंजय! मुझसे भिन्न दूसरा कोई भी परम कारण नहीं है। यह सम्पूर्ण जगत सूत्र में सूत्र के मणियों के सदृश मुझमें गुँथा हुआ है॥7॥

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Krishna Kutumb
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