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  • श्री कृष्णा भगवान ने अर्जुन से कहा

    दैवी ह्येषा गुणमयी मम माया दुरत्यया ।
    मामेव ये प्रपद्यन्ते मायामेतां तरन्ति ते ॥७- १४॥

    क्योंकि यह अलौकिक अर्थात अति अद्भुत त्रिगुणमयी मेरी माया बड़ी दुस्तर है, परन्तु जो पुरुष केवल मुझको ही निरंतर भजते हैं, वे इस माया को उल्लंघन कर जाते हैं अर्थात्‌ संसार से तर जाते हैं॥14॥

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Krishna Kutumb
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