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  • श्री कृष्णा भगवान ने अर्जुन से कहा

    तेषां ज्ञानी नित्ययुक्त एकभक्तिर्विशिष्यते ।
    प्रियो हि ज्ञानिनोऽत्यर्थमहं स च मम प्रियः ॥७- १७॥

    उनमें नित्य मुझमें एकीभाव से स्थित अनन्य प्रेमभक्ति वाला ज्ञानी भक्त अति उत्तम है क्योंकि मुझको तत्व से जानने वाले ज्ञानी को मैं अत्यन्त प्रिय हूँ और वह ज्ञानी मुझे अत्यन्त प्रिय है॥17॥

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Krishna Kutumb
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