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  • श्री कृष्णा भगवान ने अर्जुन से कहा

    यं यं वापि स्मरन्भावं त्यजत्यन्ते कलेवरम् ।
    तं तमेवैति कौन्तेय सदा तद्भावभावितः ॥८- ६॥

    हे कुन्ती पुत्र अर्जुन! यह मनुष्य अंतकाल में जिस-जिस भी भाव को स्मरण करता हुआ शरीर त्याग करता है, उस-उसको ही प्राप्त होता है क्योंकि वह सदा उसी भाव से भावित रहा है॥6॥

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Krishna Kutumb
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