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  • श्री कृष्णा भगवान ने अर्जुन से कहा

    अभ्यासयोगयुक्तेन चेतसा नान्यगामिना ।
    परमं पुरुषं दिव्यं याति पार्थानुचिन्तयन् ॥८- ८॥

    हे पार्थ! यह नियम है कि परमेश्वर के ध्यान के अभ्यास रूप योग से युक्त, दूसरी ओर न जाने वाले चित्त से निरंतर चिंतन करता हुआ मनुष्य परम प्रकाश रूप दिव्य पुरुष को अर्थात परमेश्वर को ही प्राप्त होता है॥8॥

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Krishna Kutumb
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