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  • श्री कृष्णा भगवान ने अर्जुन से कहा

    कविं पुराणमनुशासितार-
    मणोरणीयांसमनुस्मरेद्यः ।
    सर्वस्य धातारमचिन्त्यरूप मादित्यवर्णं तमसः परस्तात् ॥८- ९॥

    जो पुरुष सर्वज्ञ, अनादि, सबके नियंता (अंतर्यामी रूप से सब प्राणियों के शुभ और अशुभ कर्म के अनुसार शासन करने वाला) सूक्ष्म से भी अति सूक्ष्म, सबके धारण-पोषण करने वाले अचिन्त्य-स्वरूप, सूर्य के सदृश नित्य चेतन प्रकाश रूप और अविद्या से अति परे, शुद्ध सच्चिदानन्दघन परमेश्वर का स्मरण करता है॥9॥

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Krishna Kutumb
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