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  • श्री कृष्णा भगवान ने अर्जुन से कहा

    सर्वद्वाराणि संयम्य मनो हृदि निरुध्य च ।
    मूर्ध्न्याधायात्मनः प्राणमास्थितो योगधारणाम् ॥८- १२॥

    सब इंद्रियों के द्वारों को रोककर तथा मन को हृद्देश में स्थिर करके, फिर उस जीते हुए मन द्वारा प्राण को मस्तक में स्थापित करके, परमात्म संबंधी योगधारणा में स्थित होकर॥12॥

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Krishna Kutumb
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