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  • श्री कृष्णा भगवान ने अर्जुन से कहा

    ओमित्येकाक्षरं ब्रह्म व्याहरन्मामनुस्मरन् ।
    यः प्रयाति त्यजन्देहं स याति परमां गतिम् ॥८- १३॥

    जो पुरुष 'ॐ' इस एक अक्षर रूप ब्रह्म को उच्चारण करता हुआ और उसके अर्थस्वरूप मुझ निर्गुण ब्रह्म का चिंतन करता हुआ शरीर को त्यागकर जाता है, वह पुरुष परम गति को प्राप्त होता है॥13॥

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Krishna Kutumb
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