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  • श्री कृष्णा भगवान ने अर्जुन से कहा

    अनन्यचेताः सततं यो मां स्मरति नित्यशः ।
    तस्याहं सुलभः पार्थ नित्ययुक्तस्य योगिनः ॥८- १४॥

    हे अर्जुन! जो पुरुष मुझमें अनन्य-चित्त होकर सदा ही निरंतर मुझ पुरुषोत्तम को स्मरण करता है, उस नित्य-निरंतर मुझमें युक्त हुए योगी के लिए मैं सुलभ हूँ, अर्थात उसे सहज ही प्राप्त हो जाता हूँ॥14॥

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Krishna Kutumb
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