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  • श्री कृष्णा भगवान ने अर्जुन से कहा

    अव्यक्तोऽक्षर इत्युक्तस्-
    तमाहुः परमां गतिम् ।
    यं प्राप्य न निवर्तन्ते तद्धाम परमं मम ॥८- २१॥

    जो अव्यक्त 'अक्षर' इस नाम से कहा गया है, उसी अक्षर नामक अव्यक्त भाव को परमगति कहते हैं तथा जिस सनातन अव्यक्त भाव को प्राप्त होकर मनुष्य वापस नहीं आते, वह मेरा परम धाम है॥21॥

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Krishna Kutumb
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